
अंबेडकर विवाद: राहुल गांधी की नीली टी-शर्ट और मायावती का तीखा हमला
लोकसभा में 19 दिसंबर को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक अलग अंदाज में विरोध प्रदर्शन करते हुए नीली टी-शर्ट पहनकर सबका ध्यान खींचा। यह कदम उन्होंने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के अपमान के खिलाफ उठाया। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की मुखिया मायावती ने इसे सस्ती राजनीति करार दिया और बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर निशाना साधा।
राहुल गांधी का विरोध प्रदर्शन
राहुल गांधी ने संसद में अपने पहनावे से यह संदेश दिया कि यह उनका विरोध का तरीका है। हालांकि, मायावती ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने 20 दिसंबर को सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि “संविधान का जगह-जगह लहराना, नीला रंग पहनना यह सब दिखावा है। सत्ता और विपक्ष दोनों को अपनी जातिवादी सोच और संकीर्ण मानसिकता को साफ करना चाहिए। तभी अंबेडकर के अनुयायियों और देश के हित में सही विकास संभव है।”
अमित शाह के बयान से विवाद
पूरे विवाद की शुरुआत 17 दिसंबर को हुई जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में संविधान दिवस के अवसर पर अपने भाषण में अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा, “अभी फैशन हो गया है, अंबेडकर-अंबेडकर। इतना नाम अगर भगवान का लिया होता, तो सात जन्मों का स्वर्ग मिल जाता।” अमित शाह ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने अंबेडकर का कभी सम्मान नहीं किया और उन्हें पहली कैबिनेट से इस्तीफा देने पर मजबूर किया।
इस बयान को लेकर विपक्षी पार्टियों ने जोरदार हंगामा किया और इसे अंबेडकर का अपमान करार दिया। मायावती ने भी इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि यह बयान केवल दलित समाज को आहत करने वाला नहीं है, बल्कि पूरे देश में आक्रोश का कारण बन रहा है।
मायावती का हमला
मायावती ने बीजेपी और कांग्रेस पर एकसाथ निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी की नीली टी-शर्ट पहनने के तरीके को “सस्ती राजनीति” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ वोट पाने का तरीका है। मायावती ने यह भी कहा कि “बाबा साहेब के प्रति सच्चा सम्मान उनके अनुयायियों के हितों और अधिकारों की रक्षा से होगा, न कि ऐसे दिखावों से।”
21 दिसंबर को मायावती ने एक और बयान में कहा कि “अगर अमित शाह माफी नहीं मांगते, तो बीएसपी 24 दिसंबर 2024 को देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन करेगी।” इस आंदोलन के तहत देशभर के जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
दलित राजनीति और वोटबैंक
मायावती ने बाबा साहेब को दलितों का मसीहा बताते हुए कहा कि “आरक्षण और अन्य कानूनी अधिकार दिलाने वाले बाबा साहेब का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीजेपी और कांग्रेस जैसी पार्टियां अगर उनका आदर नहीं कर सकतीं, तो कम से कम अपमान न करें।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि बाबा साहेब के योगदान के कारण ही एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को संवैधानिक अधिकार मिले।
अंबेडकर के नाम पर शुरू हुआ यह विवाद संसद से लेकर सोशल मीडिया तक गहराता जा रहा है। राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन और अमित शाह के बयान को लेकर कांग्रेस, बीजेपी और बीएसपी के बीच तकरार तेज हो गई है। मायावती ने जहां इसे दलितों के आत्मसम्मान का मुद्दा बनाया, वहीं कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब देखना यह होगा कि बीएसपी के देशव्यापी आंदोलन का क्या असर होता है और इस मुद्दे पर राजनीतिक समीकरण कैसे बदलते हैं।